Archive for February, 2010

राजनीति का अनुलोम-विलोम

Posted on February 26th, 2010 by Harish B. Sharma

एक खबर है कि योग गुरु बाबा रामदेव अगले चुनाव में खुद को आजमाएंगे। यह एक अच्छा सोच है और इस तरह अच्छा सोचने वालों की सूची बनाई जाए तो बाबा रामदेव काफी पिछड़ जाएंगे। योगक्रांति से उन्होंने जो पद और प्रतिष्ठा प्राप्त की है वह सबकुछ राजनीति के गड़बड़झाले में उलझने की पूरी-पूरी आशंका [...]

‘पूरा मेहनताना नहीं मिलें तो लगाओ फैक्ट्री…’

Posted on February 25th, 2010 by Harish B. Sharma

योग्यता के आधार पर मिलने वाला मेहनताना इन दिनों बहस का मुद्दा बना हुआ है। इंजीनियर्स को इस बात का मलाल है कि उनके बनाए सॉफ्टवेयर करोड़ों में बेचे जा रहे हैं और उन्हें दो-तीन लाख रुपए माहवार ही मिल रहे हैं। वैज्ञानिक भी इससे खासे नाराज हैं। उनकी दवा का एक फार्मूला उद्योगपतियों को [...]

मेरी महत्त्वाकांक्षा, उनकी चाह

Posted on February 24th, 2010 by Harish B. Sharma

सामान्यतया हम खुद को लेकर काफी सजग रहते हैं। इससे भी अधिक इस बात को लेकर चाह रखते हैं कि जैसा हम खुद को समझाने की कोशिश करते हैं, वैसे का वैसा सामने वाला समझे। दूसरे शब्दों में, हम चाहते हैं कि जितना हम बताना चाहें लोग उतना ही समझें। होता इसके उलट है, जहां [...]

हर हाल में हमें एक नायक चाहिए

Posted on February 11th, 2010 by Harish B. Sharma

इस देश को जीने के लिए एक नायक चाहिए। नायक जो उसके दुख सहन करे। जनता के दुख दूर करे। इस नायक की कमी आते ही लोग अनाथ महसूस करने लगते हैं। अराजक स्थितियों की आशंकाएं व्यक्त की जाने लगती है। इस नायक के नाम पर रावण की बलि भी मंजूर है। महाभारत पर भी [...]

‘इडियट्स’ के लिए थैंक्स…

Posted on February 9th, 2010 by Harish B. Sharma

‘थ्री इडियट्स’ फिल्म को लेकर की गई मेरी टिप्पणी कुछ लोगों को आहत कर गई लेकिन इसमें मेरा कसूर नहीं है। दरअसल, इस फिल्म ने मेरी संवेदना को भी गहरे तक आहत किया। कैसे मैं समाज, शिक्षक और अभिभावकों को सिरे से खारिज कर सकता हूं जिन्हें थ्री-इडियट्स के रूप में दर्शाया जा रहा है। [...]

विकल्पहीनता के दौर में राहुल

Posted on February 8th, 2010 by Harish B. Sharma

राजनीति में राहुल गांधी की चहल-कदमी को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। मुंबई में राहुल का अंदाज राजीव गांधी को नए सिरे से परिभाषित कर रहा है। कांग्रेस इन सभी गुणों से युक्त अवतार को पाकर बाग-बाग है तो भाजपा पूरी तरह से सकपकाई हुई है। राहुल गांधी के दौरे के दौरान शिवसेना के [...]

इतने बुरे हालात तो नहीं

Posted on February 3rd, 2010 by Harish B. Sharma

हम किसी बात को साबित करने के लिए कितने-कितने सच को निगल लिए जाते हैं, यह देखने के लिए ‘थ्री इडियट्स’ से बेहतर कोई उदाहरण नहीं है। एज्यूकेशन-सिस्टम को गलत ठहराने के लिए बनाई गई इस फिल्म के लिए ‘इडियट्स’ की पूरी टीम ने न जाने कितने पापड़ बेले। यह किसी से छिपा हुआ नहीं [...]

खबरों पर नजर

Posted on February 3rd, 2010 by Harish B. Sharma

पिछले दिनों कुछ गतिविधियां उल्लेखनीय रही। सामान्यतया खबरों पर प्रतिक्रिया होती ही रहती है लेकिन इन गतिविधियों से बहुत कुछ सीख मिली, सवाल खिले और परेशानी भी हुई। साहित्य का क्षेत्र बहुत अधिक व्यापक है लेकिन बीकानेर का फलक अपनी सार्थकता को लेकर सचेष्ट है। कला-संस्कृति की दूसरी गतिविधियां भी यहां खूब होती है लेकिन [...]